Local & National News in Hindi
Header Top

गैस पाइपलाइन प्रभावित किसान संघर्ष समिति

0 67

 

  • गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा दुर्ग जिले के 21 गाँव में पाइपलाइन अधिनियम 1962 के नियमो का उल्लंघन  तथा पाइपलाइन बिछाने पर तत्काल रोक लगाने एवम किसान भाइयों के साथ बैठक के लिए……

सैकड़ो किसान भाइयों की उपस्थिति में

संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर दुर्ग, संभाग छत्तीसगढ़ को ज्ञापन सौंपा गया।

 

दुर्ग, 5 मार्च 24 _ गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा दुर्ग जिले के 21 गाँव में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। उक्त परियोजना में दुर्ग जिले के 850 से अधिक किसान प्रभावित है। उक्त परियोजना हेतु पाइपलाइन अधिनियम 1962 के प्रावधानों का उल्लंघन कर पिछले 1 वर्ष से पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है जिसका विरोध किसान भाई विगत 10 महीने से कर रहे है , इसके बावजूद भी अभी तक आपत्तियों पर जिला प्रशासन द्वारा कोई उचित कार्यवाही नहीं किया गया।

गेल (इंडिया) लिमिटेड ‌द्वारा पेट्रोलियम और खनिज पाइपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) अधिनियम 1962 में निहित धाराओं का उल्लंघन किया जा रहा है जो की निम्मलिखित है..…

1. पाइपलाइन परियोजना का विस्तृत प्रचार प्रसार गाँव स्तर पर नहीं किया गया यह कि गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा दुर्ग जिले में पाइपलाइन परियोजना की शुरुवात करने हेतु पेट्रोलियम और खनिज पाइपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) अधिनियम 1962 की धारा 3(1) के तहत भूमि उपयोग के अधिकार हेतु अधिसूचना जारी की गई थी । गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा अधिसूचना की एक प्रतिलिपि ग्राम पंचायत कार्यालय में

भेज दी गई जिसका कोई प्रचार प्रसार गाँव में नहीं किया गया । उक्त अधिसूचना को पेट्रोलियम और खनिज पाइपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) नियम 1963 में निहित नियम 3(2)(a) के तहत ढोल बजा कर इस अधिसूचना का प्रचार करना था ताकि इस अधिसूचना का व्यापक प्रचार प्रसार हो जिससे समस्त प्रभावित किसानों को सूचना प्राप्त हो सके । परन्तु गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा ऐसा नहीं किया गया जो कि उक्त नियम 3(2) (a) एवं 3 (2) (b) का उल्लंघन है।

2. उक्त परियोजना का ग्राम स्तर पर प्रचार प्रसार न होने से अधिकतर किसान दावा आपति नहीं कर पाए। यदि नोटिस जारी होने के पश्चात नियमानुसार इसका प्रचार हुआ होता तो आज किसान को इतना परेशान नहीं होना पड़ता। उक्त पाइपलाइन के सम्बन्ध में आज भी किसानो को पारदशर्शी तरीके से कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। आवश्यकता अनुसार गेल (इंडिया) लिमिटेड के अधिकृत कर्मचारी गाँव में आते है और किसानो से हस्ताक्षर करवा के चले जाते है। जानकारी के आभाव में हम समस्त पाइपलाइन प्रभावित किसान असमंजस की स्थिति में है।

3. किसानो को जारी नोटिस में आधी अधूरी जानकारी दी गई गेल (इंडिया) द्वारा अधिकृत कर्मचारी किसानों के खेतो में जा कर 20 मीटर चौड़ा समतलीकरण कार्य किया गया। जिसका किसानो द्वारा विरोध किये जाने पर गेल (इंडिया) द्वारा अधिकृत कर्मचारी किसानो से दुर्व्यवहार कर रहे है और उन्हें डरा धमका रहे है। जबकि किसानो को पूर्व सूचना देकर पाइपलाइन हेतु उपयोग की जाने वाली भूमि कि लम्बाई और चौड़ाई सहित कुल रकबा की स्पष्ट जानकारी देनी थी, परन्तु ऐसा न कर नोटिस में केवल रकबा की जानकारी दे दी गई। जब किसानों के खेतो में जा कर गेल (इंडिया) के अधिकृत कर्मचारियों ने 20 मीटर की दुरी में पोल खुटा लगाना शुरू किया तब किसानो ने इसका विरोध किया कि आपने ये जानकरी किसानो को नहीं दी।

4. फसल नुकसान हेतु बनाए गए पंचनामा में धांधली गेल (इंडिया) लिमिटेड के अधिकृत कर्मचारियों द्वारा वर्ष 2022 में किसानों के खेतो में जाकर एक पंचनामा बनाया गया है जिसमे किसानो से हस्ताक्षर करवाए गए परन्तु किसान द्वारा उक्त पंचनामा की प्रतिलिपि मांगी गई तो प्रभावित किसानो को प्रतिलिपि देने से इंकार कर दिया।

उक्त पंचनामा की प्रतिलिपि एक साल बाद सितम्बर 2023 में दिया गया। फसल नुकसान 2 से 3 बार हो चूका है पर पंचनामा एक ही बार बना है। इस तरह हमारे गाँव में पंचनामा बनाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है, हमारे खेती में हुए नुकसान का आकलन में गंभीर लापरवाही करते हुए गेल (इंडिया) के कर्मचारियों ने हम किसानों से धोखा धड़ी की है।

5. बिना सूचना दिए करते हैं किसानों के खेतो में प्रवेश यह कि गेल (इंडिया) के अधिकारियो ने पाइपलाइन बिछाने हेतु कई गाँव में किसानों को बिना सूचना दिए ही उनके खेतों के मेड़ी को तोड़ा गया, कई किसानों के खेतों में लगे फैसिंग तार को भी बिना बताये तोड दिया गया। जिससे किसानों के खेतों में रखे पैरा, गेहू तथा अन्य फसलों को मवेशियों ने खा कर नुकसान कर दिया जिसका कोई पंचनामा नहीं बनाया गया। गेल (इंडिया) के कर्मचारी मन माने तरीके से खेतों में किसानों को बिना सूचना दिए ही खेतो में प्रवेश कर जैते हैं जिसके कारण हम किसानों को बहुत नुकसान हुआ है जिसका कोई संज्ञान नहीं ले रहा है।

6. मुआवजे संबंधित लिखित सूचना नहीं दे रहे है दुर्ग जिले के 21 गाँव में से केवल 6 गाँव में ही मुआवजा की लिखित सूचना दी गई है। 15 गाँव में पेट्रोलियम और खनिज पाइपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) अधिनियम 1962 धारा 10(1) के तहत मुआवजे से संबंधित लिखित सूचना पत्र आज दिनांक तक नहीं दिया गया है। बिना लिखित सूचना दिए ही गेल (इंडिया) के कर्मचारियों द्वारा किसानो का आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका, बैंक खाती कि जानकारी और सहमती पत्र जिसमे मुआवजे से संबंधित कोई विवरण लिखे बिना ही किसानों से धोखा धड़ी कर के सहमति पत्र में हस्ताक्षर करवा लिया गया है जो कि एक संगीन अपराध है। उक्त दस्तावेजो को प्रत्येक किसान को तत्काल वापस किया जाए ।

7. ग्राम नवागांव में कुछ प्रभावित किसानो को पेट्रोलियम और खनिज पाइपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) अधिनियम 1962 धारा 10(1) के तहत मुआवजे से संबंधित लिखित सूचना पत्र नहीं दिया गया और किसानों के खाते में पैसे डाल दिए गए। जो की उक्त कानून का खुला उल्लंघन है। धारा 10(1) के नोटिस में अपीलीय अधिकारी से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।

8. ग्राम टेमरी, रौता, खरो, हिरी, नवागांव, पथरिया, डोमा में प्रभावित किसानों के खेती में पाइपलाइन मई जून 2023 में डाल दी गई है परन्तु आज दिनांक तक उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया। बिना मुआवजा दिए पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है जो की सीधा सीधा पाइपलाइन अधिनियम 1962 का उल्लंघन है।

9. यह की गेल (इंडिया) लिमिटेड के अधिकृत कर्मचारियों द्वारा एक सहमती पत्र तैयार किया गया है उक्त सहमती पत्र में मुआवजे की राशी वाले स्थान को खाली छोड़ कर किसानो से हस्ताक्षर करवाए जा रहे है जो कि एक संगीन अपराध है।

10. हस्ताक्षर करने बनाया जाता है दबाव गेल (इंडिया) के अधिकृत कर्मचारियों द्वारा केंद्र सरकार की परियोजना का हवाला देकर किसानो को कहते है कि आपको जमीन देना ही पड़ेगा हस्ताक्षर कर दो। हस्ताक्षर नहीं करोगे तो मुआवजा नहीं देंगे कहकर सहमती पत्र में हस्ताक्षर करने दबाव बनाया जाता है। इस तरह पुरे गाँव में हस्ताक्षर करवाए जा रहे

11. बिना डायवर्सन अनुमती के कृषि भूमि पर अवैध निर्माण कार्य किया जा रहा है गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा ग्राम नवागांव प.ह.न.06 तहसील बोरी स्थित भूमि खसरा नंबर 1269/2 रकबा 0.3040 हेक्टेयर भूमि का औद्‌योगिक प्रयोजन हेतु व्यपवर्तन आवेदन आज भी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के कार्यालय में विचाराधीन है उसके बावजूद सारे नियमो को दरकिनार कर गेल (इंडिया) द्वारा तेजी से निर्माण कार्य किया जा रहा था।

जिस पर दिनांक 31 जनवरी 2024 को दावा आपत्ति दर्ज कर किसान भाइयों के द्वारा उक्त अवैध निर्माण कार्य पर कानूनी कार्यवाही कर आवेदन को रद्द करने की मांग की थी। परन्तु उक्त आवेदन को आज दिनांक तक रद्द नहीं किया गया।

12. इसी तरह ग्राम मलपुरीकला प.ह.न.00012 तहसील अहिवारा स्थित भूमि खसरा नंबर 120/2 रकबा 0.7770 हेक्टेयर कृषि भूमि में बिना डायवर्सन आदेश के निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिसकी जाँच कर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करे।

13. सर्वे में गड़बड़ी, ग्राम नवागांव तहसील बोरी के किसान शामदास पिता मदनसिंह उम 70 साल जिनके भूमि का खसरा नंबर 1016/2,1016/3 तथा 1016/5 कुल रकबा 1.3 हेक्टेयर है । पाइपलाइन हेतु जारी की गई अधिसूचना में इनकी भूमि के खसरा का कोई विवरण नहीं है और आज दिनांक तक कोई नोटिस भी नहीं दिया गया फिर भी इनकी जमीन में पाइपलाइन डाल दी गई। इसका जिम्मेदार कौन है ?

14. यह कि उक्त पाइपलाइन परियोजना हेतु जारी अनुज्ञा दिनांक 15 मई 2020 की कंडिका 02 के तहत गेल (इंडिया) को अधिकतम 36 माह की समय सीमा में कार्य को पूर्ण करना था परन्तु गेल (इंडिया) द्वारा निर्धारीत समय सीमा में कार्य को पूर्ण नहीं किया, जो कि अनुज्ञा में निहित शर्तों का उल्लंघन है।

किसानों ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के सचिव से भी इसकी शिकायत की थी पर उनके द्वारा भी कोई संज्ञान न लेते हुए किसान भाइयों की सभी आपतियों को नजरंदाज कर पुनः अनुज्ञा जारी कर दी गई।

15. यह कि अनुज्ञा में निर्धारित समय सीमा में कार्य को पूरा करने हेतु अब गेल (इंडिया) लिमिटेड के कर्मचारियों  द्वारा फिर से किसानों के खेतो में सारे नियम कानून और प्रक्रिया का उल्लंघन कर तेजी से काम किया जा रहा है। जिसमें दुर्ग के समस्त प्रभावित किसानों के हितो को नजरंदाज कर दमनपूर्वक पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। जिसका किसान भाइयों के द्वारा विरोध कर जिला प्रशासन से काम को बंद करने की मांग की….

1. 15 मार्च 2024 के पहले संभाग आयुक्त की अध्यक्षता में एक संयुक्त बैठक बुलाई जाए जिसमे दुर्ग जिले के कलेक्टर, समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), गेल (इंडिया) लिमिटेड के सक्षम अधिकारी तथा उनकी टीम और दुर्ग जिले के 21 गाँव के प्रभावित किसानों को बुलाया जाए और विस्तृत चर्चा की जाए ।

2. उपरोक्त उल्लेखित पाइपलाइन अधिनियम 1962 के प्रावधानों के उल्लंघनों पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान हेते हुए दुर्ग जिले में चल रहे पाइपलाइन बिछाने के कार्यों पर रोक लगाई जाए ।

यदि निश्चित समयावधि में बैठक नहीं बुलाई गई तो किसान भाइयों के द्वारा चक्का जाम करने हेतु बाध्य होंगे ।

प्रतिलिपि,

1. संदीप कुमार गुप्ता अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, गेल (इंडिया) लिमिटेड, नई दिल्ली।

 

2. पंकज जैन सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ।

 

3. फनीन्द्र मानिकरावजी महाजन, महाप्रबंधक (निर्माण)-गेल (इंडिया) लिमिटेड, नागपुर ।

 

4. सक्षम प्राधिकारी गेल (इंडिया) लिमिटेड, रायपुर (छ.ग)

Leave A Reply

Your email address will not be published.